We should all speak up against female genital cutting

By Hatim Amiji

As a man, I found myself extremely nervous sitting in a circle of ten women at Sahiyo’s Voices to End FGM/C workshop. I had entered what I would consider a sacred space, to share my story related to female genital cutting (FGC), but more importantly, to listen to their stories. The air was dense and it was obvious that what was about to be shared would be opening up deep and unhealed wounds. I took part in Sahiyo’s storytelling workshop because I wanted to make a point that FGC is an issue males should be willing to stand against. My story highlighted how the practice alienated the relationship I had with my sister. Only by listening to her story, were we able to recreate a bond we once had as innocent children. 

IMG_7437.JPGAs the women told their stories, I listened to their descriptions of the pain they underwent both during the practice and throughout their lives. The metaphorical microphone had been passed, and I could hear what these women had kept inside for most of their lives. As a man, and therefore, in many ways an observer, I was situated in a derivative of social voyeurism. I was listening to stories that had weighed these women down for decades, but I myself never went through such experiences. And yet, I was accepted into their circle; I was given the chance to listen because they felt it was important for me to listen. In turn, the story I told was important for them to hear as well. It was one of solidarity, one that depicted a mutual understanding that this practice needs to end no matter one’s biological sex.

It is common knowledge in the community in which I was raised that this issue is one males are not to get involved in. As I have learned from women in the workshop, it’s the same for many communities around the globe. I had learned of the practice tangentially by skimming through an online pamphlet, and only learned of the prevalence of the practice by doing research on my own. It was never brought up in religious congregations, Sunday school, or in conversations with my parents. I had to bring it up to my mother in order to learn more about it, and I have yet to even speak with my father because I know he is likely as shielded from the issue as I once was.

Aside from the fact that males are less informed on the issue, it is also apparent that males turn a blind eye even in light of exposure to the practice. We are expected to let the issue stay a female issue: one that we shouldn’t meddle in because we don’t understand. It is true that I will never understand the actual manifestation and perception of pain and lifelong suffering that comes with the practice, but I do understand that this practice is a source of trauma that affects our daughters and sisters and mothers, and this is enough for men to stand up and speak out against it. Around the globe, females are robbed of their innocence in the form of genital cutting and there is absolutely no good reason why. We must speak up because this issue affects us all.

 

महिला जननांग विकृति के प्रति एक माँ का बहादुर फैसला

(यह लेख पहली बार 23 मई 2017 को अंग्रेजी में साहियो द्वारा प्रकाशित हुआ था. Read the English version here and the Gujarati translation here.)

लेखक: अज्ञात

उम्र: 30
देश: यूनाइटेड स्टेट्स

खतना शब्द और इस प्रथा से मेरा पहली बार आमना-सामना तब हुआ जब मैं 15 साल की थी। मैं एओएल इंस्टैंट मैसेंजर पर एक दोस्त के साथ चैटिंग कर रही थी और उसने मुझे पूछा क्या मेरा कभी खतना हुआ था। उस समय तक, मैं इस प्रथा के बारे में या इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि इसे मेरे बोहरा समुदाय में कम उम्र की लड़कियों पर किया जाता है।  मुझे पता नहीं था कि मैं अपनी दोस्त को क्या जवाब दूँ। मैंने सोचा कि शायद मेरा खतना मेरे जन्म होने पर ही किया गया होगा, ठीक वैसे जैसे बच्चे के जन्म पर छट्ठी (नामकरण) या अक़ीका (बकरे की कुर्बानी) किया जाता है।  

मैंने फौरन ही अपनी माँ से खतना के बारे में पूछा और यह भी पूछा क्या उन्होंने मेरा कभी कराया था या नहीं। उनका जवाब था, “नहीं बेटी, मैंने तुम्हारा नहीं होने दिया था।” और अधिक फुसफुसाहट और काफी घबराई हुई आवाज़ में उनहोंने कहा, “लेकिन किसी को बताना नहीं।” मैंने उनका पीछा किया, मैं उनसे पूछ रही थी आखिर यह होता क्या है। मेरी माँ को यह समझाने में मुश्किल हुई कि यह क्या है या यह क्यों किया जाता है। वह कह पाईं कि लड़कियों के “गुप्तांग” में काटा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि हाँ, सात साल की उम्र में वह इससे गुजर चुकी थी, लेकिन उनहोंने अपनी बेटियों के साथ ऐसा नहीं होने दिया, क्योंकि उनके खतना ने उनको भयानक शारीरिक और भावनात्मक दर्द दिया था और वो दर्द उनके साथ जीवन भर रहा है।

उस समय, मैं इस बात की अहमियत नहीं समझ पाई कि क्यों मेरी माँ ने मेरे और मेरी बहनों पर खतना नहीं करवाने का फैसला लिया और क्यों वह चाहती थी कि इसके बारे में मैं किसी से कुछ न कहूँ।

खतना के बारे में प्राथमिक जानकारी लेने के कुछ वर्षों बाद, मैं मेरी स्थानीय मस्जिद में औरतों की मीटिंग में थी। किसी ने हमारी मौलवी की बीबी, जिनको बहनसाब कहते हैं, उनसे खतना के बारे में पूछा। बहनसाब ने जवाब़ दिया कि यह औरतों में यौन आनंद को बढ़ाने के लिए किया जाता था और यह समुदाय की सभी औरतों के लिए जरूरी है। मैंने अपनी माँ से कुछ साल पहले इससे ठीक उल्टी बात सुनी थी, और बहनसाब की बातें मुझे चक्कर में डाल रही थीं। हाँ, जब बहनसाब ने कहा कि यह प्रथा सब औरतों के लिए जरूरी थी, तब मुझे समझ में आया की क्यों मेरी माँ ने मुझे किसी को यह बताने से मना किया था कि मेरा खतना नहीं हुआ है। मेरी माँ को डर था समुदाय के आदेश के खिलाफ जाने पर उनके या उनके परिवार के साथ बुरा हो सकता था, और इसीलिए, उनहोंने अपना प्रगतिशील फैसला सब से छुपा के रखा।

आज, एक व्यस्क महिला के रूप में मैं खतना के शारीरिक और भावनात्मक नुक्सान को समझ सकती हूँ, और मैं अपनी माँ के फैसले की सराहना करती हूँ। मैं सोच भी नहीं सकती हूँ जिन महिलाओं के साथ यह हुआ उनको अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में क्या झेलना पड़ता होगा। मुझे लगातार डर लगता है कि यह प्रथा अभी भी जारी है (हालाँकि यह अधिकतर गुप्त है) और “परंपरा” के अलावा अधिकतर लोगों के पास कोई वाजिब मेडिकल कारण नहीं हैं इसे  जारी रखने के लिए। मुझे उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोग इस प्रथा और इससे जुड़े नुक्सान के बारे में जानते जाएँगे, समुदाय के भीतरसे परंपरा के नाम पर छोटी बच्चियों के अंग की विकृति की इस नुक्सानदायक प्रथा को रोकने की कोशिशें बढ़ती जाएँगी।

मैंने अपनी मां से मेरा खतना नहीं करने की विनती की। उन्होंने मेरी बात सुनी

(This article was originally published in English on November 8, 2016. Read the English version here.)

नाम: अज्ञात

उम्र: 26

देश: संयुक्त राज्य अमेरिका

शनिवार की स्कूल की क्लास में मैंने पहली बार इसके बारे में सुना। एक पुरुष शिक्षक उस शनिवार की सुबह हमारी क्लास में पढ़ा रहे ते, और विषय था खतना। उस 14 वर्ष की उम्र में, मुझे वास्तव में पता नहीं था कि इसका मतलब क्या है, लेकिन मुझे पता था कि इसमें कुछ ऐसा शामिल था जो यौन-शिक्षा से संबंधित था। मैं शर्मिंदगी भरी स्थिति में कमरे के दाईं ओर लड़कियों के साथ बैठी थी, और लड़के कमरे के बाईं ओर बैठे थे। शिक्षक ने पुरूष खतना के बारे में बोलना शुरू किया; कहा कि उसमें त्वचा को सर्जरी के द्वारा हटा दिया जाता है, स्वच्छता के लिए। उसके बाद उन्होंने महिला खतना के बारे में बताया; कि यह एक लड़की की यौन इच्छा पर अंकुश लगाने के लिए किया जाता था। लड़कियों को पवित्र, शांत और आज्ञाकारी बनाना था। छोटी लड़कियों का खतना करना उन्हें असंयमित होने से बचाने का एकमात्र तरीका था। यह उनके परिवारों को शर्मिंदा होने से रोकने का एकमात्र तरीका था।

मुझे याद है कि वहां बैठकर मुझे पता नहीं था कि मेरे शिक्षक किस बारे में बात कर रहे हैं। मुझे यकीन था कि मैं कभी भी इस प्रक्रिया से नहीं गुज़री थी। मैं उस दिन उस कमरे में बैठी हुई बहुत असहज और अशांत महसूस कर रही थी।

मुझे याद है कि उसी शनिवार को हम सहेलियां क्लास की एक बड़ी लड़की के घर रहने गए थे, जहाँ पर उस दिन क्लास में जो सुना था उस विषय पर बात होने लगी। मैं चुपचाप बैठी रही जब एक दूसरी लड़की ने समझाया कि यह प्रक्रिया लड़कियों पर क्यों की जाती है, कैसे यह हमें बेहतर मुसलमान और बेहतर बोहरा बनती है, क्योंकि खतना यह सुनिश्चित करता है कि हम में यौन इच्छाओं और विवाह पूर्व संभोग की चाह नहीं जगेगी। खतना ने हमें पवित्र किया था, हमें शुद्ध किया था। मैंने गौर से सुना जब अन्य लड़कियों ने अपनी खतना की कहानियों बताई। मुझे धोखा महसूस हो रहा था क्योंकि मुझे पता था कि मैं कभी भी इस “ज़रूरी प्रथा” से नहीं गुजरी थी। उस वक़्त मुझे इस ‘ज़रूरी प्रथा’ का सही मतलब नहीं पता था। मेरी समझ में सिर्फ यह आ रहा था कि मै उन लड़कियों के जैसी नहीं थी, कि मैं एक “बुरी लड़की” थी, कि मैं गंदी थी, और मैं सिर्फ एक अच्छी मुस्लिम होने का नाटक कर रही थी।

मुझे याद है कि आखिरकार कुछ हफ्तों बाद मैंने अपनी माँ से इसके बारे में पूछने की हिम्मत जुटाई। उम्मीद भरी आवाज़ से मैंने उनको पूछा कि क्या मेरे साथ यह हुआ था, और बस मुझे याद नहीं था? उनका चेहरा बदल गया । उन्होंने अपना सिर हिलाया। जब हम भारत में थे तब उनको हमेशा मेरे मेरा खतना करवाना था, लेकिन कभी मौका नहीं मिला। मैंने उनको अपने दोस्तों से सुनी हुई कहानियाँ सुनाईं और उनसे पूछा, क्या वह मुझे इस प्रक्रिया को समझा सकती हैं, क्योंकि मुझे अपनी क्लास में इसे समझने में परेशानी हुई थी। उन्होंने मुझे खतना की प्रक्रिया समझाना शुरू किया; कैसे एक लड़की के भगशेफ या क्लाइटोरिस से त्वचा को हटाया जाता है, उसे पवित्र और शुद्ध बनाने के लिए। जैसे ही मैंने पूरी बात सुनी, मैं डरकर पीछे हट गई। उन्होंने मुझे कुछ मिनटों तक देखा, और फिर अधिकार के साथ कहा कि अगली बार जब हम भारत जाएंगे, तो वह मुझे मेरी चाची, जो एक डॉक्टर हैं, उनके पास ले जाएँगी जो मुझ पर खतना करवाएंगी। मैं उनके सामने अपने घुटनों के बल बैठ गई, उनसे भीख माँगते हुए कि मेरे साथ यह न करें, भीख माँगते हुए कि इस अकल्पनीय दर्दनाक प्रक्रिया से ना गुजरने दें। मैंने उनसे वादा किया कि मैं अच्छी रहूँगी, मैं स्वच्छ रहूँगी, मैं वह कुछ भी करूँगी जो वह चाहती थी अगर वह इस पूरी बात को भूल जाएँगी। उनहोंने सिर्फ इतना कहा कि “हम देखेंगे।”

मुझे याद है बड़े होते हुए, मैं खतना के बारे में और अधिक शोध करती रही यह जानने के लिए कि आख़िर यह होता क्या है। एक बार मेरे चचेरे भाई ने बड़े जोश से बताया कि यह कितना गलत है। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरी माँ ने मुझे कितने बड़े नुकसान से बचाया है।  आज मैं खतना को बहुत अलग नज़र से देखती हूँ।

कई युवा लड़कियों से उनका चुनने का अधिकार छीन लिया गया है। किसी ने उनसे नहीं पूछा कि क्या वे खतना कराना चाहते हैं। उनके परिवारों ने उनके अस्तित्व के एक हिस्से को चुराने का फ़ैसला कर लिया, इस बारे में कोई परवाह किए बिना कि इसका उन पर क्या असर होगा, और अक्सर अपनी अनमोल छोटी बच्चियों को अस्वच्छ और अनुभवहीन हाथों में देने का निर्णय लिया।

मुझे याद है कि महीनों पहले एक बड़ी फेसबुक चर्चा खुलकर बाहर आई, जिसमें मेरे पहचान की एक बहुत ही मुखर लड़की ने खतना के खिलाफ आंदोलन करने वालों पर पर आरोप लगाया कि वे बोहरा समुदाय की “गंदगी” को पब्लिक में बाहर ला रहे थे। उस पल के पहले मैंने अपने समुदाय के किसी व्यक्ति पर इतनी शर्म महसूस नहीं की थी। यह प्रथा गलत है, और इसका गैर-रजामंदी वाला स्वरूप मेरे लिए इसे और भी दिल दहलाने वाला और निंदनीय बनाता है। जब आपका समुदाय कुछ ग़लत कर रहा है, और इसे पैगंबर (अल्लाह उनको शांति दे) द्वारा सिखाई गई एक धार्मिक प्रथा के रूप में बता रहा है, तब आप इससे छिपकर भाग नहीं सकते हैं। आपको बहस करने के लिए मुँह खोलना पड़ेगा और चर्चा करना होगा कि हम एक समुदाय के रूप में बेहतर कैसे बन सकते हैं। आपको चर्चा करना होगा कि हम अपने समुदाय की युवा लड़कियों और युवा महिलाओं की सुरक्षा कैसे कर सकते हैं।

एक वैश्विक समुदाय होने के नाते हम इसे रोकने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। मेरी मां ने मुझे बचाया था। उन्होंने मेरे लिए अपने प्यार को सबसे पहले रखा, और आज उनकी वजह से मैं एक पूर्ण महिला हूँ। मैं उनकी सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए हमेशा आभारी हूं। सभी युवा महिलाएँ अपने शरीर पर समान सुरक्षा, समान प्रेम, समान सम्मान और समान अधिकार की हक़दार हैं। इतना तो कम से कम हम कर सकते हैं।

मेरी अनुमति के बिना मेरे सबसे गुप्त अंगों को काटा गया

(This article was originally published in English on November 5, 2016. Read the English version here.)

उम्र: 64

देश: संयुक्त राज्य अमेरिका

महिला जननांग विकृति या FGM के खिलाफ खड़े होने का समय आ गया है। यह लंबे समय से बाकी है। यह तब भी सही नहीं था जब मेरी माँ इससे गुज़री, यह तब भी सही नहीं था जब मैं इससे गुज़री और यह तब भी सही नहीं था जब मैंने अपनी बेटी के साथ यह होने दिया (मेरे माता-पिता के दबाव में)।

जिस दिन भारत में मेरे साथ एफजीएम किया गया था, मुझे उस दिन की याद है। मैं लगभग छह या सात साल की थी। मेरे भाई, जो मुझसे उम्र में बड़ा था, उसको एक दोस्त के घर पर खेलने के लिए दूर भेज दिया गया था। एक महिला, जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था, वह आयी और मुझे मेरे माता-पिता के बेडरूम में ले जाया गया जहां एफजीएम किया गया था।

मुझे लगता है कि उस घटना और उस दिन की असहज स्मृति को मैंने दबा दिया है – बस उस महिला और मुझे नीचे लिटाए रखने वाली मेरी माँ की तस्वीर को छोड़कर। मुझे याद नहीं है कि खतना के पीछे का कौनसा कारण मुझे बताया गया था। लेकिन मुझे याद है कि मेरी अनुमति के बिना मेरे शरीर के सबसे गुप्त अंग के साथ जो किया गया था, उससे मैं बहुत नाराज़ थी। यह मेरे जिस्म पर अतिक्रमण था। सबसे अधिक, मुझे इस बात पर नाराजगी है कि जिस व्यक्ति पर मैंने उस छोटी उम्र में जीवन में सबसे अधिक भरोसा किया था, उनहोंने मेरे साथ ऐसा होने दिया। हो सकता है, इसीलिए, मेरा एक हिस्सा है जो मेरी माँ को माफ नहीं कर सकता है और मुझे आश्चर्य है कि मेरी बेटी ने मुझे उसी काम को करने के लिए माफ कर दिया है।

एफजीएम को सही दिखाने के लिए इसे धर्म के लिबास में ढका जा रहा है। पर जल्द ही साहियो जैसे संगठन इस क्रूर प्रथा को बंद कर देंगे। जब तक सैयदना एफजीएम की निंदा नहीं करते हैं, और अपनी बात अमल नहीं करते हैं, तब तक मुझे खुद को दाउदी बोहरा कहने में शर्म आएगी।

Missing Link

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By Anonymous

No cuts, no wounds, but deep empathy for my sisters.
I came to NY for the 4th time but for an entirely different circumstance.

Being part of the Bohra community, I have made countless connections, some of who have been integral in my life. Yet, I still felt distant from the community that often lacked logic and ran high on emotion. Weird though, since I am kind of the same way at times.
Learning about FGM for the first time at 14, everything shifted. I have always had an ability to empathize with others, but this was something utterly outside of my scope.

I bowed my head and accepted that I will never understand the magnitude of this trauma,
but I can surely become part of a movement and advocate alongside. I can use my voice.
I can use my ability to empathize as a tool to heal the traumatic wounds.

The 2nd annual Sahiyo Retreat was nothing short of inspirational bliss.
I felt recharged.
I felt motivated.
I felt empowered.
To hear each survivor’s story and understand ways to take action–
it has become a movement.
A movement that I want to walk with.

While energy can subside, the power of one weekend
still buzzes in my heart.

Knowledge, trauma, empowerment, change, community- all words
That have taken on a new meaning entirely.

As I wait for the next retreat, I continue to ask my self
What can I do, learn, ask different every day
to continue to be well-informed and a true
activist.

Thank you, Sahiyo
For bestowing this buzz of energy
And for helping me connect the
missing link
of emotion and logic.
And that link is
SISTERHOOD.

टैटू, महिला खतना और पाखंड

(This piece was originally published in English on November 25, 2016. Read the English version here.)

अज़रा एदनवाला

उम्र: 21

देश: अमेरिका / भारत

कुछ समय पहले मैं साहियो नाम के एक संगठन से मुख्तलिफ हुई। उस समय तक मैंने अपने खतने के बारे में कभी सोचा नहीं था। सच कहु तो मुझे पता ही नहीं था की इसका मतलब क्या है। जब मैंने उन महिलाओं के लेखों को पढ़ा, जिनका खतना हुआ था, तब मुझे एहसास हुआ की इस भयानक परंपरा का एक शिकार मैं भी थी। मैंने तो बस इस याद को अंतर्मन में दबा दिया था, क्यूंकि मैं नहीं जानती थी की ये परंपरा कहाँ से आयी और इसका मतलब क्या है।

मैं शायद 5 या 6 साल की थी। अपने परिवार के साथ छुट्टी पर थी। गुजरात में कोई इलाका था, जहाँ तक मुझे याद है। इसके अलावा और कुछ याद नहीं, सिवाय दर्द से भरे कुछ छितरे-बिटरे पलों की।

मुझे एक गंदे से बाथरूम में ले जाया जाना याद है, साथ में एक पुरूष या एक महिला थीं, सफ़ेद कपड़ों में। मुझे कैंची याद है, और मुझे खून देखना याद है। मुझे रोना याद है। क्योंकि मेरे जननांगों पर एक पट्टी लगाई गई थी। मुझे याद नहीं है कि किसी ने मुझे बताया हो, कि मेरे साथ अभी यह सब क्या हुआ था या क्यों हुआ था। सब कुछ हमेशा की तरह चलता रहा, मानो कुछ घटा ही न हो। और मैंने भी उसे मान लिया, क्यूंकि मुझे यह पता ही नहीं था की मेरे शरीर के साथ क्या किया गया है।

वैसे तो मेरे खतना ने न ही मेरे मन पे कोई गहरी छाप छोड़ी है, न ही मेरे जीवन जो किसी तरह बदला है।

हालांकि जो चीज़ मुझे खुरेदती है वह यह है की आखिर ये शरीर मेरा है, और किसी को भी इसे बदलने का कोई भी अधिकार न तो कभी था, न है। खासकर वैसे हानिकारक बदलाव जो “जैसे चलता है, वैसे चलने दो” की सोच के साथ आएं।

तीन साल पहले मैंने अपना पहला टैटू करवाया था। जब मेरे एक रिश्तेदार ने मेरे शरीर पर इस टैटू को देखा, तो उन्होंने कहा, “तुम मुस्लिम हो। और हमारा धर्म यह बताता है कि शरीर को ठीक उसी तरह अपनी कब्र में लौटना चाहिए, जैसा की वह माँ की कोक से निकला था। दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो हमें अपने शरीर में कोई बदलाव नहीं करना चाहिए और इसे वैसे ही स्वीकार करना चाहिए जैसा की हमें अल्लाह ने दिया है। अगर ऐसा है, तो मेरे गुप्तांगों को क्यों काट दिया गया? यह कैसा पाखंड है?

कोई भी धर्म सिर्फ अपने सुविधानुसार अपने नियम नहीं बना सकता। हमें यह समझना होगा की धर्म आखिर हमीं ने बनाया है, और हमें उन रीती-रिवाज़ो का पालन करना छोड़ना होगा जो परंपरा के नाम पर चलती आ रही है।

हम एक आधुनिक समाज में रहते हैं, और जहां हम अभी हैं उस जगह पर हम इसलिए पहुँचे हैं क्योंकि हमने परिवर्तन को अपनाया। महिला जननांग खतना इस्लाम में एक महिला के आस्था को निर्धारित नहीं कर सकता है। मुझे यह प्रथा बड़ी छिछली लगती है, और मुझे नहीं लगता कि किसी को भी इस प्रथा का पालन करना चाहिए, विशेष रूप से छोटे बच्चों को, जिनको पता ही नहीं है कि उनके साथ क्या हो रहा है।

हो सकता है की खतना का मुझपर ज़्यादा गहरा असर नहीं पड़ा है, लेकिन ऐसी बहुत सी महिलाएं है जिन पर असर हुआ है। प्रत्येक महिला को अपने शरीर पर अधिकार होना चाहिए क्योंकि ऐसे भगवन में विश्वास रखने का कोई मतलब नहीं है जो जाहिर तौर पर ऐसी भयानक और अमानवीय प्रथा का समर्थन करते हैं।

Global Call to Action From “Uniting forces to make female genital mutilation/cutting a practice of the past: A gathering for global civil society actors”

On June 2, 2019 in Vancouver, Canada, civil society organisations, champions, survivors and other grassroots representatives came together at Women Deliver 2019 to unite voices around a global Call to Action to end female genital mutilation/cutting (FGM/C).

The pre-conference was an unprecedented gathering as a sector working globally across the issue to discuss what is needed to accelerate ending FGM/C by 2030. The event put grassroots voices at the centre and worked to strengthen our unified community of practice to support the achievement of Sustainable Development Goal 5.3. (eliminate all harmful practices, such as child, early and forced marriage and female genital mutilation).

“Uniting forces to make female genital mutilation/cutting a practice of the past: A gathering for global civil society actors” involved more than 100 participants in Vancouver. More than 270 additional participants shared their expertise and experience through an online survey. The event was co-ordinated through a core group of globally representative organisations that managed logistics:  Amref Health Africa, Coalition on Violence Against Women, End FGM Canada Network, End FGM European Network, Equality Now, Orchid Project, Sahiyo, The Girl Generation, The Inter-African Committee on Traditional Practices, The US End FGM/C Network,There Is No Limit Foundation and Tostan

Participants in Vancouver endorsed the following Call to Action:

PREAMBLE

  • FGM/C is a violation of the human rights of women and girls and must be ended in all its forms
  • We need to make FGM/C a global priority, in the same way the global community responded to other global epidemics, such as HIV/AIDs 

SUPPORTING CHANGE FROM WITHIN – CHALLENGING SOCIAL AND GENDER NORMS

  • We share a vision of a world free from FGM/C and will work in partnership with each other, all communities, governments, donors, multilateral bodies and others to end the practice by 2030 in line with the SDGs
  • Whole communities must be mobilised and empowered at the grassroots level if we are to end FGM/C – women and girls, men and boys, traditional and religious leaders, health workers
  • Ending FGM/C requires addressing the root causes of gender inequality at the community level, including gender stereotypes, unequal power relations, and negative social norms

STRENGTHENING THE EVIDENCE BASE THROUGH CRITICAL RESEARCH

  • Fill the knowledge gap on FGM/C survivors’ specific needs, impact on economic empowerment, and behaviour change around emerging trends such as medicalisation and lower ages of cutting
  • Use community-based participatory approaches within research efforts and ensure that research results and data are synthesised for communities to use
  • Create, test, and implement standardised universal indicators that are informed by context specific measures and demand country-level reporting

IMPROVING WELLBEING VIA SUPPORT AND SERVICES FOR SURVIVORS

  • More support is needed for survivors in various forms, including security and protection for survivors, targeted research and resources to enable health and emotional wellbeing
  • Enable the transformative power of survivors and survivor-led networks through support to connect with each other, other gender-based violence movements and capacity build 

ADDRESSING EMERGING TRENDS AROUND FGM/C 

  • We need an integrated, intersectional approach to ending FGM/C recognising the connections with other forms of gender-based violence and linking with existing movements 
  • We are committed to working with religious leaders, health workers and governments to respond to adaptations to the practice which continue to violate women’s rights, such as medicalisation, cross-border practices, and lowering the age at which FGM/C is carried out

INCREASING RESOURCES TO ACHIEVE THE GLOBAL GOAL

  • We call on all stakeholders to prioritise resources towards grassroots and community-led programmes. Funds should be more flexible, sustainable and accessible for communities and grassroots and capacity building should be provided as well as networks
  • Investment is needed in better research into what is working and what is not to end FGM/C. This research needs to be participatory and involve multiple stakeholders and should be made available and accessible
  • We are focused on coming together and working collaboratively to address what existing gaps there are, what are the costs of FGM/C, and what do we need to end this globally

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See call to action as PDF here.

Further Women Deliver blog posts:

Looking Back: Sahiyo at CSW/MALA’s March 2019 Event

On  March 18th 2019, the Muslim American Leadership Alliance (MALA) hosted a parallel event on “Addressing FGM in the USA: Safeguarding Survivors and Protecting Victims at the UN Commission on the Status of Women 63rd Session in New York. The panel took place at the UN Church Center. The panel convened survivors, policy makers, non-profit leaders, and community organizers to facilitate the dialogue on what necessary steps are needed to ensure ‘zero tolerance’ towards FGM for both survivors and at-risk women and girls.46892036214_50c0aab75b_o (1)47563340402_20809d8ac6_o

Speakers included: 

  • Mariya Taher, Sahiyo Cofounder 
  • Mary Franson, Minnesota House of Representatives
  • Andrea G. Bottner, J.D., Senior Advisor- Independent Women’s Forum
  • Asad Zaman, M.D
  • Zehra Patwa, WeSpeakOut Co-Founder and Sahiyo Vice-Chair of the U.S. Advisory Board

This panel analyzed the practice of FGC in the United States through a medical, psychological, and legislative lens. The panelists collectively suggested a variety of approaches to bringing communities together to gain knowledge and organize.  

The event was incredibly popular, with the room at full capacity and more guests listening from the hall.    

46892037794_a47e5323f8_oThese types of events are essential towards our progress in creating a world without FGC. 

Sahiyo talks about female genital cutting at 3rd Annual Intersections of Violence conference

On July 16th, Sahiyo Cofounder and U.S. Executive Director, Mariya Taher was invited to attend the 3rd Annual Intersections of Violence:  Domestic Violence, Sexual Assault, and Child Abuse Conference in Hampton, VA and host a break-out session on female genital cutting (FGC) in the United States. The conference is dedicated to enhancing the effectiveness of victims service professionals and brought together law enforcement, prosecutors, victim advocates, child advocates, and other allied professionals to highlight promising practices and emerging issues to effectively respond to domestic violence, sexual assault, and child abuse in our communities.  

Mariya Taher at the 3rd Annual Intersections of Violence conference

Mariya’s presentation, the only one of its kind at the conference, covered an overview of who is affected by FGC, interventions used to address FGC, and how to work/respond to survivors. Most attendees had little experience with FGC and so throughout the presentation, survivor stories, from Sahiyo Stories project were shown to participants to help contextualize that FGC was an issue within the U.S. affecting women of all different backgrounds, including religion, ethnicity, socio-economic status, education level, citizenship status, etc. 

Calling survivors of female genital cutting and health providers for a unique storytelling opportunity

Apply to be a storyteller here!

In November 2019, Sahiyo and StoryCenter will partner with The George Washington University Milken Institute School of Public Health to host a digital storytelling workshop in Washington, D.C. Sahiyo is advocating for the abandonment of female genital mutilation/cutting (FGM/C), while StoryCenter supports organizations in using storytelling and participatory media for social change.

The November workshop will focus on health and female genital cutting. With that focus in mind, Sahiyo extends an invitation to: 1) women over 18 years old, living in the United States, who have undergone FGM/C and who have a story to share about receiving healthcare in the U.S. or 2) health providers in the United States, of all genders (i.e. physicians, nurses, midwives, etc.) who have provided services to women who have undergone FGM/C.

Together these groups can highlight stories about the enduring impact of FGM/C on women’s health and/or inform health professionals of the kind of care and best practices health professionals need to be aware of when working with FGM/C survivors. The resulting short digital stories will be used to better educate health professionals on how to support survivors living in the U.S..

Sahiyo’s Inaugural Storytelling Workshop

In 2018, Sahiyo, in partnership with StoryCenter, launched an inaugural digital storytelling workshop. Nine women’s stories have since elevated the conversation about FGM/C in the U.S. and globally. The stories were distributed online and via media channels, as well as at live community screening events. They are being used as educational tools to support discussion among survivors within their communities, with a focus on challenging the social norms sanctioning FGM/C, and encouraging an end to the practice.

About Sahiyo:

Since 2015, Sahiyo has been advocating for the abandonment of FGM/C through dialogue, education and collaboration. Sahiyo conducted the first-ever international online survey of Dawoodi Bohra women on the subject of FGM/C. Read the full report here

About StoryCenter: 

StoryCenter creates spaces for transforming lives and communities, through the acts of listening to and sharing stories as a vehicle for education, community mobilization, and advocacy. They collaborate with organizations around the world on workshops in story facilitation, digital storytelling, and other forms of participatory media production. Individuals are encouraged to register for storytelling workshops. 

About The George Washington University’s Milken Institute School of Public Health:

GWU has been working closely with survivors and health care providers to develop a living virtual educational toolkit (fgmtoolkit.gwu.edu).

If you would like to participate in the workshop, apply by October 14th via this link:  http://bit.ly/DC_VoicesEndFGMC.

View informational flyer here.